सम्यक शिक्षा – Samyak Shiksha

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सत्य और धर्म पर ज्ञान-सत्र के अंतर्गत भावनगर में ओशो द्वारा दिए गए चार अमृत प्रवचनों का अपूर्व संकलन
सम्यक शिक्षा – Samyak Shiksha
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सत्य और धर्म पर ज्ञान-सत्र के अंतर्गत भावनगर में ओशो द्वारा दिए गए चार अमृत प्रवचनों का अपूर्व संकलन

जो जीवन का विराट है, जीवन में चिन्मय है, जीवन में जो भी श्रेष्ठ है; वह क्षुद्र की वेदी के सामने ... किया जाता हो, तो नहीं कहा जा सकता। जिसे हम शिक्षा समझ रहे हैं, शायद होगी आजीविका को उत्पन्न कर लेने की विधि, लिविंग उससे आ जाती होगी ... लाइव, आजीविका मिल जाती होगी; लेकिन जीवन, जीवन उससे छिन जाता है। इमर्सन ने अपने गांव के एक युवक के स्नातक हो जाने पर विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होकर लौटने पर उसके स्वागत में कहा था: मैं इस युवक का स्वागत करता हूं। इसलिए नहीं कि यह हमारे नगर का पहला व्यक्ति है जो विश्वविद्यालय की श्रेष्ठतम डिग्री लेकर लौटा है; बल्कि इसलिए कि यह विश्वविद्यालय से लौट आया है और अपने को बचा कर लौट आया है। विश्वविद्यालय इसे बिगाड़ने में समर्थ नहीं हो सका। इसलिए स्वागत करता हूं इस युवक का। हैरानी की बात इमर्सन ने यह कही, लेकिन बहुत सच है। आजीविका की शिक्षा में हम इस जीवन को गंवा आते हैं, खो आते हैं। जरूरी है आजीविका, रोटी मिलनी अत्यंत आवश्यक है, वस्त्र मिलने अत्यंत आवश्यक हैं, जरूरी है बहुत; लेकिन जीवन को खोने के मूल्य पर जरूरी नहीं है। और आजीविका इसीलिए हम खोजते हैं ताकि जीवन मिल सके। हम एक वृक्ष की जड़ों को पानी देते हैं। जड़ों के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि किसी दिन फूल आ सकें। लेकिन अगर फूल आने बंद ही हो जाएं, और हम जड़ों को ही पानी देते रहें, देते रहें, देते रहें; तो कोई हमें पागल कहेगा। जड़ों को पानी देना बहुत जरूरी है, लेकिन जड़ों के लिए ही नहीं; किन्हीं फूलों की आशा में, अपेक्षा में कि किसी दिन फूल प्रकट होंगे और हवाएं उनकी सुगंध से भर जाएंगी, और उनकी सुगंध का संदेश दूर-दूर तक आकाश में व्याप्त होगा। उस आशा में, उस प्रतीक्षा में जड़ों को हम पानी देते हैं। जड़ें न तो सुंदर हैं, न दर्शनीय, जमीन में कहीं छिपी रहती हैं। उन कुरूप जड़ों को हम सींचते रहते हैं इस आशा में कि किसी दिन सुंदर फूलों का जन्म होगा। लेकिन अगर फूल जन्मने बंद ही हो जाएं, और कोई उन जड़ों को ही इतना पानी देता रहे कि सारा जीवन गंवा दे, उसे हम क्या कहेंगे? आजीविका मनुष्य की जड़ है। रूट्‌स हैं वहां। उसके बिना जीवन खड़ा नहीं हो सकता है। लेकिन आजीविका अपने आप में अर्थहीन है। जीवन के फूल न लगें, तो इन जड़ों को लेकर हम क्या करेंगे? सारे जगत में आज जो शिक्षा है, वह जड़ों को तो बहुत मजबूत कर देती है, लेकिन फूल उससे पैदा होते दिखाई नहीं पड़ते। एक बड़ी अजीब और बहुत बेचैन करने वाली बात पैदा हुई है। इसे हम अपने खयाल में कह सकें, यह शिक्षा नहीं है। शिक्षा के अंतर्गत कुछ और विराट, कुछ और असीम स्वीकृत होना चाहिए। नहीं है क्यों यह शिक्षा? इससे श्रेष्ठतर मूल्यों का हमारे जीवन में कोई आविर्भाव नहीं होता। —ओशो

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Publisher Osho Media International
Type फुल सीरीज