अमृत द्वार – Amrit Dwar

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जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पुणे में प्रश्नोत्तर सहित हुई प्रवचनमाला के अंतर्गत ओशो द्वारा दिए गए पांच प्रवचन |

विवरण

जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पुणे में प्रश्नोत्तर सहित हुई प्रवचनमाला के अंतर्गत ओशो द्वारा दिए गए पांच प्रवचन |

उद्धरण : अमृत द्वार - पहला प्रवचन - धर्म है वैयक्तिक अनुभूति

दुख और चिंता और अशांति मनुष्य की नियति नहीं है, मनुष्य की भूल है। बीमारी मनुष्य की नियति नहीं है, मनुष्य का दोष है। स्वास्थ्य संभव है। जैसे शारीरिक स्वास्थ्य संभव है, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य भी संभव है। जैसे शारीरिक स्वस्थ होना संभव है--और रोज संभावना बढ़ती जाती है मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य की, क्योंकि हम शरीर-की खोज में लगे हैं। ऐसे ही मनुष्य के आत्मिक स्वास्थ्य की संभावना भी बढ़ सकती है, अगर हम आत्मिक-की खोज में लगें। लेकिन आत्मिक-के नाम पर हम अंधविश्वासों में पड़े हैं, तो फिर यह विकास नहीं हो सकता है। ओशो

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Publisher OSHO Media International
ISBN-13 978-81-7261-337-2
Number of Pages 136